Wednesday, September 9, 2009

सब पर तेरा एकाधिकार

ये मेरा सबकुछ तेरा है,
ये आत्मा,ये शरीर,
सब पर तेरा एकाधिकार.
तू अपने साये में रख ले छुपकर,
कहीं और अब सवेरा नहीं दीखता.
तेरी परछाई की चमकती धुप में,
पनाह दे दे मुझे.
सांस लेने दे खुल कर तेरी कासी बाँहों में,
अब हवाएं ताजी नहीं लगतीं.
देखने दे मुझे इन बंद आँखों से तेरी काय,
खुले पट से छान जाती है जगती तस्वीर.
मुझे रहने दे चरणों में तेरी,
नरम चादर पर नींद नहीं आती मुझे.
बाँध ले अपने स्नेहपाश में,
कहीं और ये प्यास बुझती नहीं अब.
तेरे बिना अधूरी मैं,
ये मेरा सबकुछ तेरा है,
सब पर तेरा एकाधिकार.

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