पीपल की शाख लहलहाती रहेगी यूँ ही!
हिचकोले खाती हुई पत्तियां कभी सिसकती हैं तो क्या,
हरीतिमा इनकी मुरझाती नही!!
कभी ठंडे बयार को गले लगा कर,
लचकती अंगडाइयां भी लेती हैं ये!
और आनंद से झूम केर,
और आनंद से झूम केर,
करती हैं अटखेलियाँ !!
सुबह की पहली किरण का स्पर्श पाकर,
सुबह की पहली किरण का स्पर्श पाकर,
बहकती हुई उल्लास में चमकती भी हैं!
और शाम की बोझिल पलकों पैर,
और शाम की बोझिल पलकों पैर,
मधिम झोकों से अपनी देती हैं थपकियाँ!!
आँधियों की थाप से चोटिल ये पत्तियां रोटी हैं तो क्या,
हरीतिमा इनकी मुरझाती नही!
आंधियों को गुज़र जाने दो,
पीपल की शाख लहलहाती रहेगी यूँ ही!!
आँधियों की थाप से चोटिल ये पत्तियां रोटी हैं तो क्या,
हरीतिमा इनकी मुरझाती नही!
आंधियों को गुज़र जाने दो,
पीपल की शाख लहलहाती रहेगी यूँ ही!!
Very nice composition.. The true factors of life are explained here..Great work..
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